Thursday, February 21, 2008

शख्सियत !

ये हैं डॉ सम्भव गर्ग। जो कि सफीदों के डी०ए०वी० स्कूल मे वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष हैं। इन्होने इग्नू की पर्यटन परीक्षा मे प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस पर भारत के उपराष्ट्रपति माननीय हमीद अंसारी ने इन्हें स्वर्ण पदक व प्रशस्ति प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। डॉ० सम्भव गर्ग का पी० एच० ड़ी० मे किया गया शोध कार्य देश ही नही, विदेशों मे भी प्रयोग मे लाया जा रहा है। उन्हें वाणिज्य के सभी प्रमुख प्रकाशकों से पुस्तकें लिखने के प्रस्ताव मिल चुके हैं। उनकी लिखित पुस्तकों के नए सत्र मे बाज़ार मे आने की संभावना है। एन० एस० एस० अधिकारी के तौर पर लगाए गए शिविर के उत्कृष्ठ परिणामो को देखते हुए सम्बन्धित विभाग ने युवा एवम् खेल मंत्रालय को उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने की अनुशंसा करके भेजा है। बढ़ते रहो सम्भव भाई, कुछ भी असंभव नही, बशर्ते लगन हो कुछ कर गुजरने की।

Tuesday, February 19, 2008

किसकी मानें ?

सभी लोगों की अपनी-अपनी सोच होती है। कुछ लोग अपनी सोच को कागज़ पर उड़ेल देते हैं और किताब के रूप मे संग्रहित भी कर लेते हैं जो कि सदियों तक इंसानों की बुद्दि पर राज करती है। कुछ लोग अन्य माध्यमों से अपने विचार बड़े अच्छे ढंग से दूसरों तक प्रेषित करने मे सक्षम होते हैं। और विशेष तौर पर मेरे देश के लोग भेड़-बकरियों की भांति इनके पीछे चल देते हैं। क्या कभी हमने गौर फ़रमाया कि इतने अच्छे विचारों वाले यें लोग खुद उन बातों पर कितना अमल करते हैं?पिछले दिनों मेरे एक दोस्त के दोस्त ने पूछा कि आप किस दार्शनिक की सोच से प्रभावित हैं ; तो मै चकरा गया, क्योंकि मै तो गांव के एक आंखों से अंधे बुजुर्ग की सोचनी से प्रभावित था, कॉलेज टाईम के एक प्रोफेसर से, अपने बारबर से, अपने दोस्त डॉo मुनीश से, गांधी जी से बेहद प्रभावित हूं और अटल जी भी प्रभावित करते हैं। जबकि विलिअम वोर्ड्सवोर्थ और रजनीश ओशो से मै इत्तफाक नही करता। वो रजनीश जो दूसरों को बन्धन मुक्त रहने की सलाह देते हैं और खुद बौद्ध से बंधे हैं तथा दुसरे लोगों को अपने साथ बाँधने की कोशिश करते हैं।मै सबसे ज्यादा प्रभावित हूं, अकबर खान से यानि अपने आप से, जिस सोच के तहत रहकर मै अपनी ज़िम्मेदारियाँ बड़ी आसानी से निभा सकता हूं। मै सोचता हूं कि बड़ी-बड़ी बातें बनाने या सुनने की बजाय हमे अपने मन की बात ईमानदारी से सुननी चाहिए, उस पर अमल करना चाहिए। हम स्वयं के सर्वोत्तम दोस्त हों और लाइफ को प्रक्टिकली जीयें तभी हम अपना और अपने राष्ट्र का सही मायनों मे विकास कर पाएंगे। क्या आप मेरी सोच से सहमत हैं? अगर हैं तो अच्छी बात है और अगर नहीं, तो भी अच्छी बात; अपने मन की अच्छी बात सुनिए और अमल कीजिए। शुभ कामनाएं !!!

मानव-मानव एक समान।

"हम किधर जा रहे हैं" के शीर्षक से सफीदों मे हुई विचार-गोष्ठी मे दिल्ली से आये युवा विचारक अली मोहम्मद फलाही ने अपने विचार यूं प्रकट किये:-जो धर्म मानवता का सम्मान न कर सके वो धर्म नही, बल्कि एक ढकोसला मात्र है, जो कि लोगो को वरग्लाता है।उन्होने शायराना अंदाज़ मे कहा कि:- नही ब्रहामन, नही अछूत
मानव-मानव एक समान
सब हैं, आदम की संतान

एवरेस्ट में हिममानव के पदचिन्ह मिले!

काठमांडू। हिमालय की दंतकथाओं में वर्णित हिममानव (येती) के अस्तित्व की खोज में लगे एक अमेरिकी टेलीविजन चैनल ने नेपाल के माउंट एवरेस्ट इलाके में इसके पदचिन्ह खोज निकालने का दावा किया है।टीवी पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम “.डेस्टीनेशन ट्रुथ” के इंफ्रारेड केमरों से लैस नौ निर्माताओं ने हिमालय के खुंबू इलाके में स्थित माउंट एवरेस्ट पर मंजू नदी के किनारे 2,850 मीटर की उंचाई पर येती के पदचिन्ह खोज निकालने का दावा किया है। टीवी कंपनी की ओर से कहा गया है कि कुल तीन पद चिन्ह मिले हैं और इनमें एक पदचिन्ह बुधवार को मिला।माउंट एवरेस्ट पर एक सप्ताह बिताने के बाद लौटने पर खोजकर्ताओं ने कल काठमांडू में यह जानकारी दी। कार्यक्रम के प्रस्तोता जोश होस्ट ने बताया कि पद चिन्हों का आकार एक फुट का है और आकार में ये लगभग एकसमान हैं।श्री होस्ट ने बताया –“मैं विश्वास नहीं कर सकता कि यह किसी भालू के पैरों के निशान हैं यह हमारे लिये अबूझ पहेली की तरह है।” गौरतलब है कि दंतकथाओं में हिमालय के माउंट एवरेस्ट इलाके में हिममानव के मिलने की चर्चायें प्रचलित हैं। इसके अलावा 1920 के बाद माउंट एवरेस्ट पर जाने वाले पर्वतारोहियों द्वारा भी इस तरह के प्रमाण मिलने की बातें कही जाती रही हैं।

अब देखिए टी.वी. अपने मोबाइल फोन पर

नई दिल्ली 24 जनवरी: देश में मोबाइल पर टेलीविजन देखने की लोगों की इच्छा जल्दी ही पूरी होने वाली है. भारतीय दूर संचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने मोबाइल टेलीविजन सेवा से संबंधित मुद्दों पर आज सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को अपनी सिफारिशें सौंप दी.ट्राई ने कहा है कि जिन दूर संचार आपरेटरों के पास सीएमटीएस या यू.ए.एस.एल लाइसेंस हैं उन्हें पहले से आवंटित स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करते हुये अपने नेटवर्क पर मोबाइल टेलीविजन सेवा देने के लिये नये लाइसेंस या अनुमति की जरुरत नहीं होनी चाहिये. प्रसारण प्रणाली से मोबाइल टेलीविजन सेवा देने के लिये अलग लाइसेंस की जरुरत होगी. दूर संचार नियामक ने कहा है कि प्रसारण प्रौद्योगिकी अपनाने का विकल्प आपरेटर पर छोड देना चाहिये. आपरेटर यदि हैंडसेट उपलब्ध कराता है तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि उपभोक्ता उसी प्रौद्योगिकी वाले दूसरे आपरेटर की सेवा लेना चाहे तो वह हैंडसेट बदले बिना ऐसा कर सके.उसने कहा है कि ऐसे लाइसेंस देने के लिये बोलियां आमंति्रत की जानी चाहिये. उसने इस सेवा के लिये 74 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति देने की सिफारिश की है. इस सेवा के लिये स्पेक्ट्रम आवंटन के बारे में ट्राई ने कहा है कि दूरदर्शन के अलावा प्रत्येक प्राइवेट मोबाइल टीवी आपरेटर को इस सेवा के लिये आठ मेगाहर्टज का कम से कम एक स्लाट 585 मेगाहट्र्ज से 806 मेगाहर्ट्ज तक यू एचएफ बैंड वी में दिया जा सकता है.Source: Oneindia